Home


Smart Air Products

स्मार्ट एयर का डी. आई. व्हाई. एयर प्यूरीफायर

शुद्ध हवा इतनी आसानी से मिल सकती है क्या आपने सोचा था?

(वैसे जानकर हमें भी आश्चर्य हुआ|)

 

प्रभावशीलता

ओरिजिनल डी. आई. व्हाई. के लिए हमने २०० वर्ग फुट के कमरे में ८ घंटे का परीक्षण किया|
औसतन पार्टिकल्स में कितने प्रतिशत कमी आयी ये नीचे दिखाया गया है|

शुद्धिकरण की गति

१५० वर्ग फुट के कमरे में ८ घंटे का परीक्षण

 

image

 

क्या एक साधारण पंखे और फ़िल्टर से प्रदुषण काम किया जा सकता है?

 

छोटा उत्तर: बिलकुल!!

लम्बा उत्तर: आगे पढ़ते रहिये…..

 

चलिए इस प्रश्न को तीन छोटे प्रश्नों में तोड़ कर देखते हैं:

१. क्या स्मार्ट एयर डी. आई. व्हाई. एयर प्यूरीफायर से स्वच्छ हवा बाहर आ रही है?

२. क्या स्मार्ट एयर डी. आई. व्हाई. एयर प्यूरीफायर पूरे कमरे की हवा साफ़ करने में सक्षम है?

३. मेहेंगे एयर प्यूरीफायर की तुलना में स्मार्ट एयर डी. आई. व्हाई. एयर पूरिफिएर का प्रदर्शन कैसा है?

 


 

१. क्या स्मार्ट एयर डी. आई. व्हाई. एयर प्यूरीफायर से स्वच्छ हवा बाहर आ रही है?

 

ये सबसे आसान प्रश्न है| हम एक डयलोस डीसी११०० प्रो पार्टिकल काउंटर को प्यूरीफायर के सामने रखते हैं और देखते हैं की क्या वो पार्टिकल की गिनती कम दर्शाता है? ये टॉम का वीडियो देखिये जिसमे वे ऐसा ही कर रहे हैं|

 

(अगर ऐसे नहीं देख पा रहे हैं तो यूट्यूब पे देखिये|)

निष्कर्ष: जी हाँ, प्यूरीफायर से बहार आ रही हवा स्वच्छ है|

 


 

 

२. क्या स्मार्ट एयर डी. आई. व्हाई. एयर प्यूरीफायर पूरे कमरे की हवा साफ़ करने में सक्षम है?

 

ये प्रश्न थोड़ा मुश्किल है क्यूंकि आपको एक नियंत्रित वातावरण की ज़रूरत है जो परीक्षण के दौरान किसी तरह से छेड़ा न जाए और ज्यादा वक्त तक हवा की जांच की जा सके| पर यहाँ अच्छी बात ये है की टॉम बड़े चतुर किस्म के इंसान हैं और ऐसी चीज़ों में उन्हें मज़ा आता है|

 

इसका उत्तर ढूंढने के लिए टॉम ने पार्टिकल काउंटर को अपने १३.५ वर्ग मीटर कमरे के एक भाग में रखा और दूसरे में भाग में डी. आई. व्हाई. प्यूरिफिएर को रखा| एक घंटे में डी. आई. व्हाई. ने ये किया:

 

और आठ घंटे बाद:

 

पार्टिकल काउंटर से ०.५ माइक्रोन पार्टिकल्स का डाटा भी मिलता है जो २.५ माइक्रोन पार्र्टिकल्स से भी सूक्ष्म होते हैं| ८ घंटे की जांच में ये डाटा कुछ ऐसा दिखता है:

निष्कर्ष: जी हाँ, डी. आई. व्हाई. प्यूरीफायर से पूरे कमरे की हवा स्वच्छ हो रही है!!!

 

हमारे जैसे चतुर इंसानों के लिए ये थोड़ा और विवरण:

इस परिक्षण की शुरुआत १६/६/२०१३ को ११:३० पीऍम को की गई, जब यू एस दूतावास के ए क्यू आई ट्विटर फीड  के अनुसार बाहर की ए क्यू आई २३० थी| (अगले दिन बाहर की हवा में सुधार आया पर इस परीक्षण के परिणाम में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया जबकि परीक्षण के दौरान ए क्यू आई १९५ से बढ़कर २०२ हो गई|)

हमारे पार्टिकल काउंटर की बाहरी हवा की जांच और यू .एस. एम्बेसी की ऐ क्यू आई की तुलना की जाए तो २३० का ऐ क्यू आई करीब २,६५० के पी ऍम २.५ काउंट के समान्तर होता है| (ध्यान रख्हें की पार्टिकल काउंटर पी ऍम २.५ की गिनती बताता है हर ०.०१ घन फुट के आयतन में| यू. एस. एम्बेसी की गणना में मिलीग्राम/घन फुट को ऐ क्यू आई में बदला जाता है| इसलिए ये गणना विभिन्न होकर भी सहसंबंधी हैं| इन दोनों में वही अंतर है जो कि अगर क्रिकेट के स्टेडियम में लोगों की गिनती की जाए या फिर उनका कुल वजन मापा जाए तो उसमे होगा| दोनों अंक सहसंबंधी हैं पर सामान नहीं हैं|

थॉमस ने अपने सयन कक्ष में दरवाज़े और खिड़कियां बंद करके ये परिक्षण किया| इस कक्ष का क्षेत्रफल १३.५ घन मीटर था और इसमें दो खिड़कियां थीं|

पार्टिकल काउंटर को स्थिर होने में करीब ५ से १० मिनट लगते हैं| इसलिए थॉमस ने इसे करीब एक घंटे का समय दिया|

 

image

ग्राफ के बीच में जो खड़ी चढ़ाई है उसका कारण यह है की थॉमस प्यूरीफायर को शुरू करने कक्ष में गए थे और हो सकता है उनके चलने के दौरान वहां धूल उडी हो| २३० की गिनती को उस समय के लिए स्थिर गिनती माना जा सकता है|

प्यूरीफायर शुरू करने के पहले ग्राफ ऊपर की ओर जा रहा था| इसका कारण ये हो सकता है की थॉमस का ह्यूमिडिफिएर (इसमें फ़िल्टर लगे हैं) जो परिक्षण के पहले चल रहा था, उससे कक्ष में हवा थोड़ी स्वच्छ हो रही थी|

इस परिक्षण के नतीजे से अंततः यह पता चलता है की फ़िल्टर का प्रभाव अंशांकन से उलझा नहीं है|

 


 

 

३. मेहेंगे एयर प्यूरीफायर की तुलना में स्मार्ट एयर डी. आई. व्हाई. एयर पूरिफिएर का प्रदर्शन कैसा है?

 

कुछ उदार व्यक्तियों ने हमें ब्लू एयर २०३/२७०ई (४९,५०० रूपए ), फिलिप्स ऐ सी ४०७२ (३४,१४० रूपए ) ओर एक आई क्यू एयर हेल्थ प्रो (८५,००० रूपए ) उपहार में दिया| इनका उपयोग हमने अपने डी. आई. व्हाई. के साथ परीक्षण करने में किया, जिसके लिए हमने एक ही कमरे ओर एक ही पार्टिकल काउंटर का उपयोग किया| परीक्षण का समय भी समान रखा गया|

यह करने के लिए आना ने ब्लू एयर के साथ ११, फिलिप्स के साथ ९ ओर आई क्यू एयर के साथ ११ परीक्षण किये| पार्टिकल्स में आई प्रतिशत कमी से थॉमस ने प्रभावशीलता का अनुमान लगाया| एयर प्यूरीफायर को शुरू करने के पहले आना ने अपने १५ वर्ग मीटर के कक्ष की हवा को जांचा ओर फिर पार्टिकल काउंटर को हर एक घंटे में मांप लेने के लिए सेट किया| आना ने हर प्यूरीफायर को अधिकतम सेटिंग पे रखा|

हर प्यूरीफायर ने पार्टिकल्स को काफी कम कर दिया पर ८,७९९ रूपए वाले कैनन ने भी लगभग उतने ही पार्टिकल फ़िल्टर किये जितने बड़े नाम वाले प्यूरीफायर ने किये| ३,९५९ रूपए वाला ओरिजिनल भी ब्लू एयर से मात्र ६ प्रतिशत पीछे रहा ०.५ माइक्रोन पार्टिकल्स फ़िल्टर करने में ओर ४ प्रतिशत पीछे २.५ माइक्रोन पार्टिकल्स में|

इन विभिन्न कंपनियों के प्यूरीफायर में पार्टिकल फ़िल्टर करने की क्षमता ओर मूल्य में कोई रिश्ता नहीं दिखाई पड़ा|

निष्कर्ष: आप ब्लू एयर, फिलिप्स और आई क्यू एयर के मूल्य से बोहत कम खर्चे में अपने घर से पार्टिकुलेट प्रदुषण को निकाल सकते हैं|

 

हमारे जैसे चतुर इंसानों के लिए ये थोड़ा और विवरण:

तरीका: आना ने रात्रि में सोने के पहले प्यूरीफायर को अधिकतम सेटिंग में शुरू किया और सुबह उठ कर इसे बंद किया| पर्टिक्युलेटेड को जांचने के लिए उन्होंने डयलोस पार्टिकल काउंटर का उपयपग किया, जिससे ०.५ माइक्रोन के ऊपर और २.५ माइक्रोन के ऊपर के पार्टिकल्स को मापा जा सकता है| पार्टिकल काउंटर ने हर घंटे एक मांप लिया|

प्रभावशीलता का अनुमान: थॉमस ने कक्ष के पार्टिकलतेस के प्रतिशत में आयी कमी से प्रभावशीलता का अनुमान लगाया| प्यूरीफायर शुरू करने के पहले की गिनती को आधारभूत रखा गया| आखरी चार घंटे के औसत को आखरी मांप माना गया| हमने ये तुलना बाहर की बजाय अंदर की क्यूंकि:

१. अंदर की हवा बाहर की हवा से स्वच्छ होती है बिना प्यूरीफायर के भी(इसका ये मतलब नहीं की ये सुरक्षित है)|

२. कक्ष के आधारभूत मांप से बाहर की हवा का अनुमान हो जाता है क्यूंकि अंदर के पार्टिकल्स भी बाहर की हवा के मुताबिक कम या ज्यादा होते हैं|

यह जरूर हो सकता है की परीक्षण शुरू होने के बाद बाहर की पार्टिकल्स में बढ़ोतरी हो जाए (इससे प्रभावशीलता कम माँपी जाएगी) या बाहर के पार्टिकल्स कम हो जाएं ( इससे प्रबाहवशीलता ज्यादा माँपी जाएगी)| पर देखा जाए तो कई परीक्षणों के बाद इस प्रभाव का औसत हो जाता है और इसके नतीजे उन दिनों से समान हो जाते हैं जब बहार की हवा में पार्टिकल्स का स्तर करीबन स्थिर होता है|

 

कक्ष: आना के कक्ष का क्षेत्रफल १५ वर्ग मीटर है और यह चाओयांगमें, बेइजिंग में स्थित है| परिक्षण के दौरान आना ने दरवाज़े और खिड़कियां बंद कर दिए थे पर परिक्षण की शुरुआत में उन्होंने दरवाज़े को कई बार खोला था| हालांकि ज्यादातर समय के लिए दरवाज़े और खिड़कियां बंद थे, पर ये घर पुराण होने के कारण बाहर की हवा थोड़ी मात्रा में अंदर लीक हो रही थी|

ज्यादा जानकारी के लिए थॉमस के पुराने पोस्ट का अंत देखें| सभी परीक्षणों को एक ही तरीके से किया गया था|

प्यूरीफायर: हमने आई क्यू एयर हेल्थ प्रो (८५,००० रूपए), ब्लू एयर २०३/२७०ई (४९,५०० रूपए ), फिलिप्स ऐ सी ४०७२ (३४,१४० रूपए ), स्मार्ट एयर ओरिजिनल और कैनन का परिक्षण किया|

फ़िल्टर की अवस्था: सभी परिक्षण ख़त्म होने के बाद आई क्यू एयर ने हमें बताया की प्रे फ़िल्टर को १,९३१ घंटे और उपयोग किया जा सकता है, कार्बन फ़िल्टर को ३,०७७ घंटे और हेपा को १,९१० घंटे| इससे ये पता चलता है की फ़िल्टर अच्छी अवस्था में थे|

डाटा: कैनन, ब्लू एयर और फिलिप्स का रॉ डाटा थॉमस के पुराने पोस्ट में है| आई क्यू एयर का रॉ डाटा नीचे दर्शाया गया है|

विसंगति: ११ दिनों में से एक दिन का डाटा बिलकुल अलग था| २२ मई को आई क्यू एयर ने ०.५ माइक्रोंस के सिर्फ ६८ प्रतिशत पार्टिकल्स फ़िल्टर किये| साधारणतः जब बाहर की हवा काफी ख़राब हो जाती है तो हमें ख़राब नतीजे मिलते हैं| पर २२ मई को बाहर की हवा में पार्टिकल का स्तर ७४ से ११० मइक्रोग्राम्स के बीच था जोकि सामान्य है|

२२ मई को नतीजे ख़राब होने का कोई कारण नहीं मिलने के कारण हमने उस दिन के डाटा को हटाया नहीं| अगर हम उस दिन के डट को हटाकर फिर से विश्लेषण करते हैं तो भी नतीजे थोड़े ही अच्छे होते हैं: ०.५ माइक्रोंस के लिए ९३ प्रतिशत और २.५ माइक्रोंस के लिए ९६.५ प्रतिशत| इससे ये पता चलता है की आई क्यू एयर और फिलिप्स का प्रदर्शन समान्तर है और कैनन से ४ प्रतिशत नीचे है|

image

image

image

image

image

image

 

अगर हमारे परिक्षण पे आपको कोई प्रश्न है तो आप हमें ईमेल कर सकते हैं|

हम रॉकेट साइंस नहीं जानते पर स्वच्छ हवा के विषय पे काफी ज्ञान दे सकते हैं|

मेरे लिए कौनसा डी आई व्हाई प्यूरीफायर बेहतर है?

जानें अपनी हवा को

हमने कई एयर क्वालिटी मॉनीटर्स को वैज्ञानिक करके से परखा तो ये दो मॉनीटर्स सफल हुए| कारण|


भारत में स्वच्छ सांसों की गिनती:

0

 

हमारे गणित के बारे में जानकारी


दिल्ली एनसीआर में ३-४ दिन में और बाकि के भारत में ६-८ दिनों में वितरण| आप हमारे लाडो सराय स्थित कार्य स्थल पधार कर अपना आर्डर तुरंत भी ले सकते हैं|

 

यदि आप अपने ऑफिस, स्कूल या उद्योग में स्वच्छ हवा चाहते हैं तो यहाँ देखें|


मीडिया में स्मार्ट एयर

 


NDTV Gadgets

“A social enterprise built around an ethos of frugal innovation called Smart Air is disrupting the air purifier space in India with a DIY kit priced at Rs. 3,399, almost half the China price of the Xiaomi Mi Air Purifier 2.”

और जानें|

Your Story

“The Delhi-based startup Smart Air Filters produces an indoor air purifier that is highly effective against PM 2.5, the primary air pollutant affecting urban Indian cities.”

और जानें|

Wall Street Journal

“Smart Air’s do-it-yourself filters are available for 3,399 rupees – a fraction of the cost of conventional models on the market. This rudimentary invention is making air purifiers no longer a luxury for the rich.”

और जानें|

CNN Money

“Customers drop by the shop to pick up orders, many of them clearly relieved to be getting a filter for their home or office. Their purifier is a very simple answer to a complicated problem.”

और जानें|

 


एनडीटीवी पे स्मार्ट एयर

 

 


गैजेट गुरु पे आमने सामने का परिक्षण

 

 


संस्थाएं जो स्मार्ट एयर के प्यूरीफायर इस्तेमाल कर रही हैं

 

 

 


स्मार्ट एयर का परिचय और डेमो

 

(अगर ऐसे नहीं देख पा रहे हैं तो यूट्यूब पे देखिये|)



 

 

पीऍम२.५ क्या है और क्यों घातक है?

 

पीऍम२.५ अत्यंत सूक्ष्म कण होते हैं जो हवा में काफी समय तक तैरते हैं और हवा को धुंधला कर देते हैं| ये आकार में २.५ माइक्रोमीटर या उससे छोटे होते हैं|

ये कण सूक्ष्म होने के कारण फेफड़ों में काफी गहराई तक चले जाते हैं और कई बार रक्त प्रवाह में भी पहुँच जाते हैं| दीर्घकाल में पीऍम२.५ से दिल का दौरा, मस्तिष्क का दौरा, कैंसर और वातस्फीति जैसी फैफड़ों की बीमारी हो सकती है| लघु अवधि में इससे उच्च रक्त चाप, ह्रदय गति की परिवर्तनशीलता में कमी, फेफड़ों की क्षमता में कमी, रक्त नलिकाओं में सूजन और रुकाव हो सकता है| अनुसन्धान से यह भी पता चला है की इससे कार्य उत्पादकता में कमी आ सकती है और मनोदशा पे प्रभाव पड़ सकता है|

 


 

पीऍम२.५ से आप कैसे बच सकते हैं?

 

सबसे अच्छा और दीर्घकालिक उपाय यह है की गाड़ियों, फैक्टरियों और बिजली संयंत्रों से निकलते प्रदुषण को नियंत्रित किया जाए| पर जब तक ये होता है हमें सवयं को सुरक्षित रखने के लिए अपने घरों में प्रदुषण घटाने की और बाहर वैज्ञानिक रूप से जांचे गए मास्क पहनने की जरुरत है| वैज्ञानिक डाटा से साफ़ पता चलता है की मास्क काम करते हैं| हेपा प्यूरीफायर का डाटा भी सीधे तरह से दर्शाता है की इससे पार्टिकुलेट प्रदुषण में बड़ा प्रभाव पड़ता है| विश्वशनीय यादृच्छिक परीक्षणों ने पाया है की मास्क और प्यूरीफायर के इस्तेमाल से वायु प्रदुषण के उच्च रक्त चाप, रक्त नालियों की सूजन और रुकाव जैसे प्रभावों से बचा जा सकता है|

 


कौन स्मार्ट एयर की साँस ले रहा है?

हज़ारों लोगों ने पूरे भारत में जाना है की स्वच्छ हवा के लिए आपको अपना हाँथ और पैर बेचने की जरुरत नहीं है|

Who is breathing Smart Air in India


एक स्मार्ट एयर ब्रीदर की कहानी

 

(अगर ऐसे नहीं देख पा रहे हैं तो यूट्यूब पे देखिये|)